डोकलाम विवाद पर चीनी सेना ने कहा ‘हम पीछे जा रहे हैं’ लेकिन उसके पहले भूटान ने दिखाई थी ऐसी अकड़ जिसने चीन की हेकड़ी तोड़ दी

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कुछ ही दिन पहले चीन की एक राजनयिक ने दावा दिया था कि भूटान ने मान लिया है कि डोकलाम पर चीन का अधिकार है. लेकिन अब इसी दावे को खारिज करते हुए भूटान ने चीन को ऐसा जवाब दिया है जिसे सुनकर चीन भी सकते में आ जाएगा. भारत चारों तरफ से कई देशों से घिरा हुआ है और उसके पड़ोसी अक्सर उसको परेशान करने की नाकाम कोशिश करते रहते हैं. इनमें से पाकिस्तान और चीन दो ऐसे देश हैं जो हर समय भारत के खिलाफ ही योजना बनाने की सोचते रहते हैं. भारत की सरहदें अक्सर तनाव ग्रस्त रहती हैं एक तरफ पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आता और वहीँ दूसरी तरफ चीन भी भारत से उलझता रहता है. चीन कभी सिक्किम को लेकर भारत से उलझता है तो कभी डोकलाम को लेकर. हालांकि भारत चीन और पाकिस्तान की किसी भी चाल को कामयाब नहीं होने देता. चीन कई बार अपने दावों को सिद्ध करने के लिए कई झूठ बोलता आया है जो कि इस बार भी हुआ है.



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भारत और चीन के बीच चल रहे विवाद के बीच एक खबर आई थी कि भूटान ने डोकलाम के विवादित क्षेत्र पर चीन का अधिकार मान लिया है. हालांकि इस दावे की पुष्टि हो चुकी है और चीन का यह अधिकार झूठा साबित हो चुका है. दरअसल चीन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बात का दावा किया था कि डोकलाम के जिस हिस्से को लेकर विवाद चल रहा है और भारत-चीन की सेनाएं आमने-सामने खड़ी हैं, उस हिस्से को भूटान ने चीन के भूभाग के तौर पर स्वीकार कर लिया है.

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यह बात चीन की वरिष्ठ राजनयिक वांग वेनली ने भारतीय मीडीया के एक प्रतिनिधिमंडल के सामने कही थी. हालांकि वांग के इन दावों की पुष्टि हो चुकी है और वे झूठी साबित हो चुकी हैं. वांग ने अपने दावे को सिद्ध करने के लिए कोई साक्ष्य भी नहीं दिया था.

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चीन की राजनयिक वांग ने दावा किया था कि भूटान ने कूटनीतिक माध्यमों का सहारा लेकर पईचिंग के पास यह संदेश भिजवाया कि जिस इलाके को लेकर भारत और चीन की सेनाएं आमने-सामने हैं वो क्षेत्र उसका नहीं है. जबकि भारत और भूटान शुरुआत से ही डोकलाम के इस विवादित क्षेत्र को थिंपू के भूभाग का हिस्सा मानते आये हैं. भारत और भूटान रक्षा सहयोगी हैं इसीलिए भारत, चीन का विरोध कर रहा है. भूटान के द्वारा शुरुआत से ही इस मामले में चीन का विरोध हुआ है. भूटान ने कहा था कि 16 जून को चीन की सेना ने डोकलाम में घुसकर सड़क बनाने की कोशिश की थी जो कि चीन-भूटान के बीच हुई संधि का उल्लंघन था.

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भारत के विदेश मंत्रालय ने 30 जून को डोकलाम विवाद पर एक बयान देते हुए कहा था कि, ’16 जून को चीन की आर्मी (PLA) की एक निर्माण टुकड़ी डोकलाम इलाके में घुस गई और वहां सड़क बनाने की कोशिश की है. रॉयल भूटान आर्मी के एक गश्तीदल ने उन्हें ऐसा करने से रोकने की कोशिश भी की थी.’ भारत ने यह भी कहा था कि, ‘भूटान का विदेश मंत्रालय इस बात पर जोर दे रहा है कि चीन द्वारा भूटान की सीमा के अंदर सड़क बनाने की कोशिश करना 1988 और 1998 में दोनों देशों के बीच हुए करार का सीधा उल्लंघन करना है.’

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भूटान ने चीन से अपील भी की थी कि वह डोकलाम क्षेत्र से बाहर चला जाए और 16 जून 2017 से पहले की यथास्थिति बनाकर रखे.’ भारत ने उस समय भी चीन को चेताया था कि ऐसा अड़ियल रुख रखकर उसकी सीमा के विवाद सुलझाने की प्रक्रिया पर बड़ा असर पड़ेगा. भूटान का रक्षा सहयोगी होने के कारण भारत ने डोकलाम सीमा से बाहर निकलने से चीन को सपष्ट रूप से मना कर दिया था.

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आपको बता दें कि भूटान और भारत के आधिकारिक रुख से अलग चीन ही अलग सी बात कर रहा है. वांग ने दावा किया था कि भूटान अपने क्षेत्र से भारत और चीन के सैनिकों की गतिविधियों पर नज़र बनाए हुए है. ख़ैर ये बात तो पूरी दुनिया जानती है कि चीन झूठ का सहारा लेने वाला देश है और झूठ के सहारे ही वो अपने दावों को सिद्ध करना चाहता है लेकिन ये संभव नहीं है और अब उसका यह दावा भी झूठा साबित हो चुका है.



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चीन के वरिष्ठ राजनयिक वांग वेनली ने भारतीय मीडीया के एक प्रतिनिधिमंडल के सामने कहा था कि भूटान ने इस बात को स्वीकार कर लिया है कि डोकलाम का क्षेत्र उसका अपना इलाका नहीं है. लेकिन वहीँ इस बात को ख़ारिज करते हुए भूटान सरकार के अधिकारी ने कहा है कि भूटान ने कभी कोई ऐसा बयान नहीं दिया है. उन्होंने चीन को साफ़ करते हुए कहा कि डोकलाम अभी भी भूटान का हिस्सा है न कि चीन का. 

 

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