बदले मे भारत देदेगा ऐसा जवाब चीन ने कभी नहीं सोचा होगा, जवाब सुन “चीन” की सारी दुनिया में हुई बुरी बेज़त्ति..

अब भारत में एक ऐसी सरकार है जो चीन को उसी की भाषा में जवाब देती है, और फिर एक बार ऐसा ही हुआ अरुणांचल प्रदेश के संवेदनशील “असाफिला” इलाके में भारतीय सेना के गश्त पर चीन को ऐतराज़ है, और उसने भारतीय पक्ष के सामने ये मुद्दा उठाया है और कहा है की “असाफिला” में भारतीय सेना बार बार घुस रही है, “असाफिला” में भारतीय सेना घुसकर अतिक्रमण कर रही है, और इस से चीन और भारत के रिश्ते ख़राब हो सकते है

चीन द्वारा ये मुद्दा उठाये जाने पर भारत ने साफ़ कर दिया है की “असाफिला” हमारा इलाका है, और भारतीय सेना वहां बार बार घुसती रहेगी, और इस इलाके पर भारतीय सेना का ही कण्ट्रोल रहेगा, चीन की ये बात नहीं मानी जाएगी, जबकि चीन ने कहा की “असाफिला” इलाके में भारत न घुसे





चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के प्रतिनिधिमंडल ने खास तौर पर भारतीय सैनिकों द्वारा असाफिला में सघन गश्त का जिक्र करते हुए कहा कि इस तरह के ‘‘उल्लंघन’’ से इलाके में दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ सकता है. हालांकि, चीनी ऐतराज को खारिज करते हुए भारतीय पक्ष ने कहा कि उसके सैनिक वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के बारे में अवगत हैं और सेना एलएसी तक गश्त जारी रखेगी, चीनी सेना ने विशेष रूप से पिछले साल 21,22 और 23 दिसंबर को असाफिला में फिशटेल-एक के निकट बड़े पैमाने पर भारतीय गश्त का जिक्र किया. भारतीय और चीनी सैनिकों ने सीमा पर तनाव बढ़ाने वाले मुद्दों के समाधान के लिए बीपीएम का आयोजन किया था.

 

 

अरूणाचल प्रदेश में बम ला और किबिथू, लद्दाख में दौलत बेग ओल्डी और चुशुल और सिक्किम में नाथू ला में वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास पांच बीपीएम केंद्र हैं. 15 मार्च को बीपीएम का आयोजन किबिथू इलाके में चीन की तरफ दईमाई चौकी पर हुआ. बीपीएम में चीनी पक्ष ने भारतीय पक्ष पर पिछले साल दिसंबर में तूतिंग में सड़क निर्माण के उसके उपकरण को भी क्षतिग्रस्त करने का आरोप लगाया. आरोप है कि यह घटना तब हुयी जब सड़क निर्माण से जुड़ा दल भारत के विरोध के बाद अपना उपकरण वहां छोड़कर चला गया था. सूत्रों ने बताया कि भारतीय सेना ने आरोपों से इंकार किया.





चीनी सड़क निर्माण दल दिसंबर के अंतिम सप्ताह में तूतिंग इलाके में एलएसी के करीब एक किलोमीटर अंदर भारतीय क्षेत्र में आ गया था. भारतीय सैनिकों की ओर से गतिविधि रोकने के लिए कहे जाने पर सड़क निर्माण टीम इलाके से चली गयी. उन्होंने बताया कि भारतीय सेना ने डोकलाम गतिरोध के बाद एलएसी के पास किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए युद्धाभ्यास तेज कर दिया है.सेना के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘ हम किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.’’

 

चीन के दबाव में पहले की सरकार आ जाति थी, इसी कारण चीन का मन बढ़ गया था, पर जब से मोदी सरकार भारत में आई है, चीन को भारतीय सेना उसी की भाषा में जवाब दे रही है, और चीन सिर्फ मुद्दा उठाने के अलावा कुछ नहीं कर पा रहा है, मेजर गौरव आर्य ने भी कहा की अब ये 1962 वाला भारत नहीं है, अब चीन सिर्फ मुद्दे उठाने के अलावा कुछ नहीं कर सकता

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