मक्का मस्जिद बम धमाके में आ गया कोर्ट का चौंकाने वाला फैसला, कोंग्रेसियों और वामपंथियों के पैरो तले ज़मीन खिसकी

नई दिल्ली : हार बार किस तरह हिन्दू संतों को बदनाम करने कि अनेकों साज़िश रची गयी लेकिन अंत में कोर्ट के फैसला ने सच सामने ला ही दिया. मक्का मस्जिद के बम धमाके को लेकर कोर्ट का बेहद चौंकाने वाला फैसला आ रहा है जिससे तुषितकरण करने वाले नेताओं के पैरों तले ज़मीन खिसका दी है.

 

11 साल बाद मक्का मस्जिद बम धमाके में आया चौंकाने वाला फैसला




अभी अभी बड़ी खबर आ रही है 11 साल बाद आज मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस में फैसला आ गया है. इस मामले में आरोपी स्वामी असीमानंद समेत सभी 5 आरोपियों को कोई ठोस सबूत ना होने की वजह से बरी कर दिया गया.

बता दें 18 मई 2007 को जुमे की नमाज के दौरान मक्का मस्जिद में हुए विस्फोट में 9 लोगों की मौत हो गई थी और 58 लोग घायल हुए थे. स्थानीय पुलिस की शुरूआती छानबीन के बाद मामला सीबीआई को स्थानांतरित कर दिया गया था.

पिछली सरकार ने साध्वी प्रज्ञा और स्वामी असीमानंद को ही फंसाया था जानबूझकर तुष्टिकरण की राजनीति के लिए हिन्दू संतो का अपमान किया गया और बिना चार्जशीट के जेल में प्रताड़ित किया गया था.

सीबीआई ने एक आरोपपत्र दाखिल किया. इसके बाद 2011 में सीबीआई से यह मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी ( एनआईए ) के पास गया. इस धमाके में स्वामी असीमानंद समेत कुल 10 लोगों पर आरोप लगा था, एक आरोपी की मौत हो चुकी है.

गहरी जांच के बाद इस घटना को लेकर दस लोगों को आरोपी बनाया गया. इसमें अभिनव भारत के सभी सदस्य शामिल है. स्वामी असीमानंद सहित, देवेन्द्र गुप्ता, लोकेश शर्मा उर्फ अजय तिवारी, लक्ष्मण दास महाराज, मोहनलाल रतेश्वर और राजेंद्र चौधरी को मामले में आरोपी घोषित किया गया. दो आरोपी रामचंद्र कालसांगरा और संदीप डांगे अब भी फरार है. एक प्रमुख अभियुक्त और आरएसएस के कार्यवाहक सुनील जोशी को जांच के दौरान ही कट्टरपंथियों ने गोली मार दी थी.




इससे पहले आपको बता दें स्वामी असीमानंद को अजमेर ब्लास्ट केस में पहले से ही बरी कर दिया गया था. साथ ही मालेगांव और समझौता धमाके में भी उन्हें पहले ही जमानत दी जा चुकी है.

तो वहीँ इस फैसले के बाद अब राणा अय्यूब और राजदीप ने कोर्ट का अपमान करते हुए इस फैसले को देशविरोधी तुरंत बता दिया है. जब 2G घोटाले के आरोपियों को कोर्ट ने बरी कर दिया था तब ये दोगले ही खुशियां मना रहे थे , कोई 2G घोटाला हुआ ही नहीं. अब जब कोर्ट ने एक संत को बरी कर दिया तो ये लोग कोर्ट को शर्मनाक और अँधा कोर्ट कह रहे हैं.

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