ऑपरेशन ट्राइडेंट: भारतीय नौसेना ने 4 दिसंबर की ही रात को पाकिस्तान का किया था ये हाल !

4 दिसंबर को भारतीय नौसेना दिवस मनाया जा रहा है. इस मौके पर आज हम आपको भारतीय नौसेना की एक ऐसी कहानी से अवगत करायेंगे जिसे सुनकर आपको भी भारतीय नौसेना पर गर्व होगा. आइये बताते हैं आपको उस समय की कहानी के बारे में- 1947, और 1965 के बाद 1971 में भारत के लिए तीसरा मौका था, जब भारत की पाकिस्तान से जंग चल रही थी. इस लड़ाई में पाकिस्तान ने अपना पूर्वी हिस्सा बांग्लादेश को गवाना पड़ा था जो उसके लिए एक बड़ा झटका था.



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बता दें कि उस समय यह एक पहला मौका था जब भारत-पाकिस्तान की नौसेना आमने-सामने थी. इससे पहले भारत ने पाकिस्तान को थल सेना और वायु सेना के द्वारा धूल चटाई थी. 4-5 दिसंबर के बीच भारत ने ऑपरेशन ट्राइडेंट के जरिये पाकिस्तान को जो झटका दिया था उसे पाकिस्तान कभी भुला नहीं सकता है. इसी दिन भारत की जीत के चलते हुए आज के दिन भारतीय नौसेना दिवस मनाया जाता है.

पहली बार हुआ मिसाइल का इस्तेमाल 

ऑपरेशन ट्राइडेंट में ऐसा पहली बार हुआ था जो भारत को एंटी शिप मिसाइल का प्रयोग किया है. बता दें कि 1971 के समय में कराची का बंदरगाह पाकिस्तान के लिए महत्वपूर्ण मायने रखता था. इसी के साथ पाक नौसेना का भी पूरा अड्डा यही था. 1971 के इसी आखिरी समय में भारत-पाक के बीच ज्यादा लड़ाई बढ़ गयी थी. हालत बिगड़ते हुए देख भारत ने 3 विद्युत मिसाइल बोट तैनात कर दी थी. जिसके बाद ऑपरेशन ट्राइडेंट की योजना बनी.



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रात में किया हमला

हेडक्वार्टर और वेस्टर्न नेवल कमांड ने मिलकर इस ऑपरेशन की योजना बनाई. योजना बनी कि कराची स्थित पाकिस्तानी नौसेना अड्डे पर हमला किया जायेगा और हमला विद्युत मिसाइल बोट के माध्यम से होना था. फिर क्या था योजना अनुसार 4 दिसंबर को 460 किलोमीटर दूर कराची पर हमला करने की तैयारी शुरू कर दी. बता दें कि हमला रात में किया जाना था क्योंकि पाकिस्तानी एयरफोर्स रात में लड़ाई लड़ने में सक्षम नहीं थे. जिसके बाद रात के समय में कमांडर बबरू भान के नेतृत्व में भारतीय नौसेना ने पाकिस्तान पर हमला बोल दिया.

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हमले में पाक का हुआ था नुकसान 

बता दें कि भारतीय नौसेना ने योजना अनुसार ऑपरेशन की तैयारी इतनी अच्छे तरीके से की थी कि पाकिस्तान को कुछ करने का मौका ही नहीं मिल पाया. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस लड़ाई में पाकिस्तान के 4 पोत बर्बाद होकर डूब गए थे. इसी के साथ 1 पोत तो बुरी तरह नष्ट हुआ था जो बाद में बेकार हो गया था. इस ऑपरेशन में भारत ने कराची हार्बर फ्यूल स्टोरेज को भी पूरी तरह से नष्ट कर दिया था. बता दें कि भारत की ताकत का आप इसी बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि इस ऑपरेशन में भारत का किसी तरह का कोई नुकसान नही हुआ था. इस ऑपरेशन में भारत की तरफ से 3 विद्युत क्लास मिसाइल बोट व 2 एंटी सबमरीन कोवर्ट ने भाग लिया था.

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