PM मोदी के इस फैसले से भीमटों के मुंह पर जोरदार तमाचा विरोधियों के बोलती हुई बंद

आरक्षण का विचार इसलिए आया था ताकि उन लोगों को मुख्य धारा में लाया जा सके जो समाज से अभी अलग-थलग हैं. आरक्षण के द्वारा शैक्षिक पिछड़ेपन को दूर करने की और सरकारी सेवाओं में पिछड़े समुदायों की भागेदारी सुनिश्चित करने की कोशिश की गयी थी. संविधान निर्माताओं ने आरक्षण इसलिए दिया था ताकि दबे-कुचले लोगों को उनके अधिकार मिल सकें और उसके बाद जब वो मुख्य धारा में आ जाएं तो आरक्षण छोड़ दें लेकिन जैसे-जैसे वक्त बदलता गया आरक्षण के मापदंड ही बदल दिए गए. राजनीतिक दलों ने अपने फायदे के लिए आरक्षण को चुनावी मुद्दा तक बना दिया. भारत में आरक्षण को लेकर अभी तक बहस छिड़ी है.

The idea of the reservation was to come so that people could be brought to the mainstream, which is now isolated from the society. Tried to remove educational backwardness by reservation and to ensure the participation of backward communities in government services. The constitution makers had given reservation so that the dumb people could get their rights and after that, they left the reservation if they came to the mainstream, but as the time changed, the criteria for reservation was changed. Political parties made reservations for their benefit till the electoral issue. There has been debate over the reservation in India so far.





आरक्षण पर लिया गया फैसला

जहाँ एक तरफ भारत में आज भी आरक्षण के मुद्दे पर बहस जारी है वहीं हमारे पड़ोसी मुल्क ने आरक्षण पर एक अहम फैसला ले लिया है. दरअसल बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने सरकारी सेवाओं में आरक्षण प्रणाली खत्म करने का फैसला लिया है. बता दें कि बांग्लादेश में विशेष समूहों के लिए आरक्षित नौकरियों वाली विवादित नीति के खिलाफ कई दिनों से पूरे देश में हज़ारों छात्रों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया जा रहा था जिसके बाद शेख हसीना को अपना फैसला वापस लेना पड़ा.

 

 

Decision on reservation

While on the one hand there continues to debate the issue of reservation in India, our neighboring country has taken a major decision on reservations. Indeed, Bangladesh’s Prime Minister Sheikh Hasina has decided to end the reservation system in government services. Let us say that after many days in protest against the controversial policy reserved for special groups in Bangladesh, thousands of students were protesting across the country, after which Sheikh Hasina had to withdraw her decision.


विरोध करने वाले छात्र भी हुए घायल

यह विरोध इतना बढ़ गया था कि बांग्लादेश की राजधानी ढाका में छात्रों की भीड़ ने मुख्य मार्गों को बंद कर दिया जिससे यातायात लगभग ठप हो गया था. इसके अलावा ढाका विश्वविद्यालय में हुई कई झड़पों में 100 से भी ज्यादा छात्र घायल हो गए थे. छात्रों पर रबड़ की गोलियां चलाई गईं थीं. इन सारे घटनाक्रमों को देखते हुए प्रधानमंत्री शेख हसीना को सरकारी नौकरियों में आरक्षण खत्म करने की घोषणा करनी पड़ी.

Protesters injured

This protest had increased so much that the crowd of students in Dhaka’s capital Dhaka closed the main roads, which caused traffic almost stalled. In addition, more than 100 students were injured in many clashes in Dhaka University. Rubber bullets were run on the students. Given all these developments, Prime Minister Sheikh Hasina had to announce the termination of reservation in government jobs.

 






आजतक की खबर के अनुसार, शेख हसीना ने नाराजगी जताते हुए कहा कि, ‘छात्रों ने काफी प्रदर्शन कर लिया, अब उन्हें घर लौट जाने दें.’ इसके साथ ही उन्होंने यह बात भी कही कि सरकार उन लोगों के लिए नौकरियों में विशेष व्यवस्था करेगी जो विकलांग हैं.

According to the news of Aaj Tak, Sheikh Hasina expressed displeasure and said, “The students have performed a lot, let them go home.” They also said that the government will make special arrangements for the jobs for those people who are disabled

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