‘खिलते हैं गुल यहां, खिलके बिखरने को’ मधुर मुस्कान के शहजादे शशि कपूर का निधन

बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता शशि कपूर का 79 साल की उम्र में सोमवार शाम निधन हो गया। 70 और 80 के दशक में रोमांस के प्रतीक रहे शशि ने कोकिला बेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में अपनी अंतिम सांसे लीं। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे और पिछले तीन हफ्ते से उनकी हालत ज्यादा खराब थी।




वर्ष 2014 में फिल्मी दुनिया के सबसे बड़े ‘दादा साहब फालके पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया था। 18 मार्च 1938 में कोलकाता में जन्मे शशि ने अभिनय के साथ ही कई फिल्मों का निर्देशन भी किया। शशि साहब की मौत की खबर सुनते ही बॉलीवुड के कई दिग्गज कलाकारों, निर्देशक-निर्माताओं ने शोक प्रकट किया।

शशि कपूर का असली नाम बलबीर राज कपूर था। प्यार से शशि कहलाए जाने वाले एक्टर ने फिल्मों में इसी नाम से आने का फैसला लिया। अपने दोनों भाई राज कपूर और शम्मी कपूर से छोटा होने के कारण उन्हें शशि बाबा भी कहा जाता था।

इस फिल्म से की थी करियर की शुरुआत

1961 में ‘धर्मपुत्र’ से शशि ने अपना करियर शुरू किया। इस फिल्म का निर्दशन यश चोपड़ा ने किया था जो ‘आचार्य चतुरसेन’ नामक उपन्यास पर आधारित थी। 1961 को इस फिल्म को प्रेसिडेंट सिल्वर मेडल मिला। शशि ने जब बतौर हीरो अपना करियर शुरू किया तब उनके भाई राज कपूर और शम्मी कपूर अपने करियर के शीर्ष पर थे।

‘नमक हलाल’ और ‘दीवर’ जैसी फिल्मों के लिए मशहूर शशि के बारे में कहा जाता है कि लड़कियां और महिलाएं उनकी दीवानी थी। शशि कपूर को बड़ी सफलता फिल्म ‘जब जब फूल खिले’ (1965) से मिली। मधुर संगीत, रोमांटिक कहानी और शशि कपूर-नंदा की जोड़ी ने सभी का मन मोह लिया।




शशि कपूर की फिल्में

शशि ने 70 और 80 के दशक के मध्य तक 116 फिल्मों में काम किया। आग, आवारा, जब जब फूल खिले, शर्मीली, चोर मचाए शोर, दीवार, कभी-कभी, सत्मय शिवम सुंदरम, सुहाग, काला पत्थर, शान, क्रांति, नमक हलाल को शशि कपूर के करियर की यादगार फिल्में माना जाता है।

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