NRC अवैध बांग्लादेशी विवाद में ममता बैनर्जी को लगा सबसे बड़ा झटका, मोदी से पंगा लेना पड़ा बड़ा महंगा, लग गया प्रतिबंध, फूंके पुतले

नई दिल्ली : अवैध बांग्लादेशियों को बाहर का रास्ता दिखाने के लिए असम में NRC (नेशनल रजिस्टर ऑफ़सिटीजन ) का अंतिम ड्राफ्ट सामने आया जिसमे 40 लाख अवैध लोग पाय गए. जिसके बाद से ममता बुरी तरह बौखलाई हुई हैं और खून खराबे और गृहयुद्ध जैसी धमकी दे रही हैं. हर रोज़ मीडिया में बयान दे रही हैं और इसे सुपर इमरजेंसी बता रही हैं. लेकिन इस बीच NRC मुद्दे पर विवाद खड़ा करने पर ममता बनर्जी को बड़ा ज़ोरदार झटका लगा है.

 

NRC विवाद पर ममता को लगा ज़ोरदार झटका

अभी मिल रही बड़ी खबर के मुताबिक एनआरसी मुद्दे का विरोध करना टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को महंगा पड़ता नजर आ रहा है. दरअसल कल देर रात ममता ने अपने 8 नेताओं का एक दल असम भेजा था. जिसके बाद ममता के इन 8 नेताओं (सुखेंदु शेखर राय, ककोली घोष दस्तीदार, रत्न दे नाग, नदीमुल हक, अर्पित घोष और ममता ठाकुर और फिरहद हकीम) को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है क्यूंकि प्रशासन को पता था कि ये असम में धार्मिक सद्भाव बिगाड़ने और मुस्लिमों को NRC पर भड़काने आ रहे हैं जिससे राज्य में दंगे शुरू हो जाय.

ममता के नेताओं ने ममता के खिलाफ ही छेड़ा विद्रोह

तो वहीँ अब ममता के गृहयुद्ध वाले देशद्रोही बयान पर ममता के ही खिलाफ बगावत शुरू हो गयी है. असम राज्य में टीएमसी अध्यक्ष द्विपेन पाठक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. इसके साथ ही TMC पार्टी के दो नेताओं – प्रदीप पचानी और दिगंता सैकिया ने भी यह कहते हुए पार्टी छोड़ दी कि वे उस पार्टी में नहीं बने रहना चाहते हैं जो मूल असमी लोगों की पहचान से समझौता करना चाहती है.

पुतला फूंका

ब्रह्मपुत्र घाटी के चारैदेव और सोनितपुर जिलों में छात्र संगठनों ने बनर्जी के पुतले फूंके. उन्होंने तृणमूल और पार्टी सुप्रीमो बनर्जी को असम के मामले में दखल नहीं देने की चेतावनी दी.

गृहयुद्ध की धमकी देने वाली ममता ने 2005 में कुछ और कहा था

दरअसल ममता बनर्जी का बड़ा ही दोगला चेहरा मीडिया में सामने आने के बाद से ये इस्तीफों की झड़ी लग गयी है क्यूंकि यही ममता बेनर्जी जो आज अवैध बांग्लादेशियों के साथ खड़ी हैं और NRC के विरोध में गृहयुद्ध,खूनखराबे की धमकी दे रही है लेकिन 13 साल पहले 2005 में बांग्लादेशियों के सख्त खिलाफ थी. 2005 में ममता बनर्जी विपक्षी सांसद थीं और उन्‍होंने संसद में कहा था, ”बंगाल में घुसपैठ एक भयानक समस्‍या बन चुकी है और यहां की वोटर लिस्‍ट में बांग्‍लादेशियों का नाम है.” और जब सत्ता पक्ष माकपा ने उनकी बात नहीं सुनी तो उन्होंने स्पीकर के मुँह पर कागज़ भी फाड़कर फेंके थे.

 

ममता के नेताओ ने करी मारपीट, दो पुलिस वाले घायल

तो वहीँ गिरफ्तार होता देख ममता के नेताओं ने अफरातफरी मचा दी. टीएमसी की नेता महुआ मोइत्रा को जब एक लेडी कॉन्स्टेबल ने हंगामा मचाने से रोका, तो उन्होंने उसे ही धक्का देकर गिरा दिया. महिला पुलिसकर्मी ने हाथ जोड़कर महुआ मोइत्रा से शांत रहने को कहा लेकिन इसका उन पर कोई असर नहीं हुआ. उल्टे वह कॉन्स्टेबल पर ही भड़क उठीं और मारपीट पर उतर आयी. इस हाथापाई के दौरान लेडी कॉन्स्टेबल को गंभीर चोटें भी आई हैं.

धारा 144 लागू

दरअसल डीजीपी कुलधर सैकिया ने कहा, ‘हमने टीएमसी डेलिगेशन से अनुरोध किया था कि वे सिलचर न आएं क्योंकि हमारे लिए राज्य में शांति बनाए रखना जरूरी है. कछार जिले में धारा 144 लागू की गई है, हमें डर था कि इनके आने से लोगों में मतभेद और टकराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।’

ममता के नेताओं पर लगा बैन

टीएमसी सांसदों और विधायकों को हिरासत लेने के बारे में डीजीपी ने कहा, ‘पुलिस ने उन्हें एयरपोर्ट के अंदर ही रोका और उनकी आवाजाही पर रोक लगा दी। इस बीच हमारे दो कॉन्स्टेबल और जिला प्रशासन का एक कार्यकर्ता घायल हो गया। ऐसे में घायलों द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर और धारा 144 के उल्लंघन के लिए ममता के इन नेताओं पर उचित कार्रवाई की जाएगी.

इस बीच गुवाहाटी के पुलिस कमिश्नर ने टीएमसी नेताओं की शहर में एंट्री रोकने के लिए एक आदेश जारी किया है। इसके जरिए टीएमसी के 8 सांसद और विधायकों के गुवाहाटी आने पर बैन लगाया गया है। आदेश में कहा गया है कि ये नेता एनआरसी के खिलाफ भड़काऊ भाषण दे सकते हैं. किसी भी यात्री सेवा (स्थल या एयर ट्रांसपॉर्ट) के जरिए इन नेताओं को गुवाहाटी नहीं लाया जाना चाहिए.

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