एटीएस अधिकारियों व् कोंग्रेसियों को सजा दिलवाने के लिए कर्नल पुरोहित ने उठाया बड़ा कदम, राहुल-सोनिया के छूटे पसीने

नई दिल्ली : मालेगांव ब्लास्ट में कर्नल पुरोहित को फंसा कर कांग्रेस ने हिन्दुओं को आतंकवादी साबित करने की खूब कोशिश की, मगर अब कांग्रेस की ये कोशिश ना केवल नाकाम हो गयी बल्कि उसी पर भारी पड़ रही है. कर्नल पुरोहित खुद को फंसाने वालों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं. खबर है कि कर्नल श्रीकांत पुरोहित की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई टल गई क्योकि जस्टिस यू यू ललित ने सोमवार को पुरोहित की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है. अब नई बेंच पुरोहित की याचिका पर सुनवाई करेगी.

 

सुप्रीम कोर्ट पहुंचे कर्नल पुरोहित

दरअसल, पुरोहित ने अपनी याचिका में खुद को साजिश के तहत फंसाए जाने का आरोप लगाते हुए कोर्ट की निगरानी में SIT जांच की मांग की है. आपको बता दें कि इससे पहले पुरोहित ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर अपने ऊपर लगे गैरकानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम (यूएपीए) को चुनौती दी थी.

इससे पहले बाम्बे हाईकोर्ट ने मामले में कर्नल पुरोहित और समीर कुलकर्णी की याचिका को खारिज कर दिया था. तब सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल इंन्वेसिटिगेशन एजेंसी (NIA) और महाराष्ट्र सरकार को नोटिस भेज कर चार हफ्तों के अंदर जवाब देने के लिए कहा था.

पिछले साल मिली थी जमानत

पिछले साल मालेगांव ब्लास्ट केस में आरोपी कर्नल श्रीकांत पुरोहित को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दी थी. कर्नल पुरोहित पिछले 9 साल से जेल में थे. सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए जमानत दी थी. पुरोहित ने सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया था.पुरोहित ने एटीएस पर उन्हें फंसाने का आरोप लगाया था.

एनआईए और सरकार के वकीलों ने कहा था कर्नल पुरोहित इस मामले में मुख्य आरोपी है उन्हें जमानत नहीं दी जाए. एनआईए ने जांच प्रभावित होने का दावा किया था,लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया था. कोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया था कि मामले की जांच के दौरान लंबे समय तक आरोपी को जेल में रखा गया था.

क्या है मालेगांव ब्लास्ट मामला

गौरतलब है कि 29 सितंबर 2008 को मालेगांव में एक बाइक में बम लगाकर विस्फोट किया गया था, जिसमें आठ लोगों की मौत हुई थी और तकरीबन 80 लोग जख्मी हो गए थे. साध्वी और पुरोहित को 2008 में गिरफ्तार किया गया था और तब से वे जेल में हैं. जांच एजेंसी के मुताबिक, विस्फोट को दक्षिणपंथी संगठन अभिनव भारत ने कथित तौर पर अंजाम दिया था.

एनआईए के मुताबिक, पुरोहित ने साजिश रचने वाली बैठकों में सक्रियता से हिस्सा लिया है और वह विस्फोट में इस्तेमाल करने के लिए विस्फोट का इंतजाम करने को भी राजी हो गया था. पुरोहित ने दलील दी थी कि एनआईए कुछ आरोपियों को आरोपमुक्त करने में भेदभाव कर रही है और एजेंसी ने उसे मामले में बलि का बकरा बनाया है.

हाफिज के बदले कर्नल का सौदा

इससे पहले रॉ के पूर्व उच्चाधिकारी आरएसएन सिंह भी बता चुके हैं कि तत्कालीन कांग्रेस नेता पाकिस्तान को फायदा दिलाने की कोशिश कर रहे थे. समीकरण बन रहा था कि हम तुमसे हाफ़िज़ सईद को मांगेंगे तो तुम कर्नल पुरोहित को मांगना. दरअसल कर्नल पुरोहित सेना के जासूस थे और अपने खुफिया मिशन के दौरान कर्नल पुरोहित पाकिस्तान के कई संवेदनशील और नापाक राज जान गए थे, कर्नल पुरोहित का बड़ा जासूसी नेटवर्क भी पाकिस्तान में खुफिया जानकारियां जुटा रहा था. इसीलिए पाकिस्तान कर्नल पुरोहित की कस्टडी की मांग कर रहा था.

हिन्दू आतंकवाद जुमले को साबित करने की साजिश

उन्होंने बताया था कि इस्लामिक आतंकवाद को छिपाकर लश्कर व् अल-कायदा आतंकियों को बचाने और भगवा आतंकवाद का जुमला गढ़ने के लिए कर्नल को फंसा दिया गया. 26/11 मुंबई हमले का पूरा षड्यंत्र भी हिन्दुओ को आतंकी घोषित करने के लिए पाकिस्तान ने रचा था, ताकि इस्लामिक कट्टरपंथी आतंकियों पर से ध्यान हटाया जा सके. प्लान था कि आतंकी हमला करने के बाद सभी आतंकियों को मार दिया जाएगा और इस हमले को भी हिन्दू आतंकवाद से जोड़ दिया जाएगा.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि लश्कर के अमेरिकी गुर्गे डेविड कोलमैन हेडली ने जांच एजेंसी एनआईए की पूछताछ में कबुल किया था कि हमले की साजिश लंबी तैयारी के बाद अमल में लाई गई थी. मुंबई में 26/11 को हुए आतंकी हमले में पकड़ा गया पाकिस्तानी आतंकवादी आमिर अजमल कसाब इसी साजिश के तहत हाथों में कलावा बांधकर मुंबई में घुसा था. खुद को हिंदु साबित करने के लिए कसाब ने हाथों में कलाबा बांधा था.

 

 

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