भीमा कोरेगाव हिंसा में गिरफ्तार आरोपियों के समर्थन में आयी कांग्रेस, सुप्रीम कोर्ट पहुंचे सारे वामपंथी,मानवाधिकार संगठन

नई दिल्ली : कल पूरे देश में सुबह से बड़ा सियासी तूफ़ान तब खड़ा हो गया जब पूरे देश के 8 राज्यों में पुलिस और स्पेशल फाॅर्स ने भीमा-कोरेगाव हिंसा में धरपकड़ करी और 5 वामपंथियों या URBAN नक्सली को गिरफ्तार किया गया जो विचारक, लेखक, पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता और वकील के रूप में देश में बड़ी साज़िश को अंजाम दे रहे थे.


बता दें भीमा-कोरेगाव हिंसा के तार पीएम मोदी की हत्या की साज़िश के साथ जुड़े है. गिरफ्तार JNU प्रोफेसर विल्सन के घर से चिट्ठी मिली है जिसमे पीएम मोदी के साथ राजीव गाँधी जैसा हत्याकांड करने की बात कही गयी थी. लेकिन अब बड़ा ही अजीब दोगला पन देखने को मिल रहा है कांग्रेस इन मोदी की हत्या की साज़िश रचने वालों के ही समर्थन में खड़ी हो गयी है.

कल गिरफ़्तारी आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

अभी बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है हमारे देश में सुप्रीम कोर्ट में ही लाखों केस पेंडिंग पड़े हुए हैं. दस बीस साल में फैसला आता है. सुनवाई भी 6 महीने बाद होती है. लेकिन आप जानकार हैरान रह जायेंगे कल ही इन 5 वामपंथियों और नक्सली विचारधारा के लोगों को गिरफ्तार किया गया है और आज इनका मामला सुप्रीम कोर्ट में 3 : 30 बजे सुना जाना है. ऐसा लगता है जैसे सुप्रीम कोर्ट बड़ा ही खली बैठा था उसके पास कोई और मामले ही नहीं थे सुनने के लिए इसलिए बिना वक़्त गंवाए अगले ही दिन सुनवाई ले ली. कश्मीरी पंडितों के मामले में ये कोर्ट सुनवाई लेने से हिचकिचाते हैं.

ये तो कुछ भी नहीं जिन नक्सल समर्थक आरोपियों के ऊपर पीएम मोदी की हत्या की साज़िश और उनको सबूत के साथ गिरफ्तार किया गया है उनके ही समर्थन में अब कांग्रेस खड़ी हो गयी है. ऐसा लगता है जैसे खुद कांग्रेस चाहती है कि किसी तरह पीएम मोदी को उनके रस्ते से हटाया जाय. इन्ही पांच नक्सल समर्थक की गिरफतारी के विरोध में इतिहासकार रोमिला थापर और चार अन्य कार्यकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है.

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता और कांग्रेस के वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने इस याचिका का उल्लेख कर इस पर आज ही सुनवाई करने का अनुरोध किया और कोर्ट ने उनकी बात झट से मान भी ली. न्यायालय में दायर याचिका में इन कार्यकर्ताओं की रिहाई का अनुरोध किया गया है.

गिरफ्तार नक्सलियों के समर्थन में खड़े हुए राहुल

तो वहीँ अब खुद नक्सल समर्थकों के समर्थन में राहुल गाँधी खड़े हो गये हैं. इस कार्रवाई पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सवाल उठाए हैं। राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ‘भारत में गैर सरकारी संगठन (NGO) के लिए केवल एक जगह है और वह आरएसएस है। अन्य सभी गैर सरकारी संगठनों को बंद करो। सभी कार्यकर्ताओं को जेल में डालो और शिकायत करने वालों को गोली मारो। नए भारत में आपका स्वागत है।’

सीपीएम आयी कांग्रेस के समर्थन में

राहुल गांधी के अलावा सीपीएम नेता प्रकाश करात ने भी केंद्र सरकार पर तंज कसा है. वामपंथी विचारकों की गिरफ्तारी की निंदा करते हुए करात ने कहा, ‘’यह लोकतांत्रिक अधिकारों पर एक बड़ा हमला है. हम मांग कर रहे हैं कि इन लोगों के खिलाफ सभी मामलों को वापस ले लिया जाए और उन्हें तत्काल रिहा कर दिया जाए.’’

प्रशांत भूषण : ये तो इमरजेंसी है

बता दें जब से ये नक्सल समर्थक गिरफ्तार हुए हैं तब से राजपीप सरदेसाई और खगरीका घोसे , अभिसार, रब्बिश कुमार जैसे अनेक पत्रकारों के पेट में ज़बरदस्त जलन कल सुबह से उठी हुई है. दनादन सोशल मीडिया पर ये एक के बाद एक ट्वीट कर रहे हैं और नक्सल समर्थक के समर्थन में मोदी सरकार का विरोध कर रहे हैं. कुछ पत्रकारों और रोहिंग्या समर्थक वकील प्रशांत भूषण ने तो इसे EMERGENCY बता दिया है.

ये लोग इन नक्सल समर्थको को लेखक, सामाजिक कार्यकर्ता, विचारक और बुद्धिजीवी बता रहे हैं. आप के आशुतोष ने तो इन लोगों को दलित बता दिया है और मोदी सरकार को दलित विरोधी जबकि इनमे से एक भी दलित नहीं है.

गौरतलब है कि पिछले साल पुणे में एक कार्यक्रम के बाद महाराष्ट्र के कोरेगांव भीमा गांव में हुई हिंसा की जांच के तहत छापे मारे गए हैं
जिसके बाद हैदराबाद में वामपंथी कार्यकर्ता और कवि वरवर राव, मुंबई में कार्यकर्ता वेरनोन गोन्जाल्विस और अरूण फरेरा, छत्तीसगढ़ में ट्रेड यूनियन कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज और दिल्ली में रहने वाले सिविल लिबर्टीज के कार्यकर्ता गौतम नवलखा के घरों के लैपटॉप और अन्य सामान को कब्जे में ले लिया गया. इससे पहले विल्सन वामपंथी को गिरफ्तार किया गया था जहाँ से पता चला ये लोग पीएम मोदी की हत्या की साज़िश रच रहे थे.

 

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