NIA गिरफ्त में जेलर ने उगले राज़, ऐसी ख़ुफ़िया जानकारी देख अधिकारीयों की फटी रह गयी आखें, सेना चीफ भी हैरान

नई दिल्ली : कश्मीर में आतंकवाद एक दिन में नहीं पैदा हो गया बल्कि ये आतंकवाद की फैक्ट्री बना है क्यूंकि पिछले कई दशकों से पिछली कांग्रेस सरकार ने अलगाववादियों के घर में बैठ कर चाय नाश्ता किया है और आतंकियों को पाल पोस कर बड़ा किया है. कुछ महीने पहले कश्मीर की जेल में NIA ने छापे मारी करी थी जिसके बाद खुलासा हुआ था कि जेल के अंदर ही आतंक की फैक्ट्री बनायीं जा रही थी. आतंकी जैश और हिज़्बुल संगठन के झंडे, सैकड़ों मोबाइल,सिम कार्ड, घातक हथियार, नक़्शे सब बरामद किया गया था.

तो वहीँ आज NIA ने कश्मीर जेल के जेलर को ही गिरफ्तार किया है और उससे जेल के कई राज़ उगलवाए हैं जिससे अब खुल सामने पता चल रहा है कि जेल में कैसे कैसे कांड हो रहे थे. ये खुलासा आपकी आखें खोल के रख देगा.

NIA की गिरफ्त में आये जेलर ने उगले राज़
अभी मिल रही मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जम्मू कश्मीर के अंबफला जिला जेल के जेलर फिरोज अहमद लोन को एनआईए ने गिरफ्तार कर लिया है. लोन इससे पहले श्रीनगर सेंट्रल जेल में तैनात था. अब इसे एनआईए कोर्ट में पेश किया जाएगा। इसके साथ ही एक अन्य साजिशकर्ता इशाक पल्ला को भी एनआईए ने गिरफ्तार कर दस दिन की रिमांड पर लिया है.

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अधिकारीयों की भी आखें फटी रह गयी
रिमांड पर जाते ही जेलर ने एक के बाद एक सारे राज़ उगलने शुरू कर दिए जिन्हे सुन NIA के अधिकारीयों की भी आँखें फटती चली गयी. भारतीय सेना कई बार बताती है कि POK में इतने आतंकी कैंप चल रहे हैं, पाकिस्तान में सेना आतंकी कैंप चला रही है लेकिन कश्मीर की इस जेल के अंदर ही ये जेलर आतंकी कैंप चला रहा था और कैदियों को आतंकी बनने की ट्रेनिंग दे रहा था.

एनआईए ने अपनी जांच में पाया कि जम्मू श्रीनगर के सेंट्रल जेल में फिरोज अहमद लोन, इशाक पल्ला तथा दो युवाओं सुहैल अहमद भट व दानिश गुलाम लोन के बीच जेल परिसर में 25 अक्टूबर 2017 को बैठक हुई। इसमें युवकों को ट्रेनिंग के लिए सीमा पार भेजने की साजिश रची गई। शोपियां का पल्ला विभिन्न मामलों में जेल में बंद था जो मुख्य साजिशकर्त्ता रहा। कुपवाड़ा पुलिस ने 30 अक्टूबर को एलओसी के पास से सुहैल और दानिश को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उन्होंने पीओके में आतंकी प्रशिक्षण लेने जाने की बात स्वीकार की। एनआईए के अनुसार पकड़े जाने से पहले युवक ब्लैकबेरी मैसेंजर के जरिये एक दूसरे के संपर्क में थे.
इसके बाद एनआईए ने केस संख्या आरसी-07/2018 के तहत मामला दर्ज करते हुए जांच शुरू की। पल्ला तथा बडगाम निवासी फिरोज दोनों को मंगलवार को एनआईए ने हिरासत में लिया। अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए देश विरोधी गतिविधियों के लिए फिरोज ने काम किया। केस दर्ज होने के बाद फिरोज का तबादला जम्मू में कर दिया गया था। सूत्रों का कहना है कि दोनों युवक जैश आतंकी संगठन से जुड़े हुए थे।

लश्कर के आतंकी नवीद जट्ट के छह फरवरी को फरार होने में भी एनआईए डिप्टी जेल सुपरिंटेंडेंट से पूछताछ कर रही है। नवीद जट के फरार होने के बाद 21 फरवरी को एनआईए ने मामला दर्ज किया। एनआईए को आशंका है कि नवीद जट को भगाने में भी जेल के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत है। नवीद को उपचार के बहाने अस्पताल भेजा गया और कुछ सुरक्षाकर्मियों पर फायरिंग भी की गई। जेल से आपत्तिजनक सामान व दस्तावेज में नवीद जट के पोस्टर भी बरामद किए गए थे।

जेल को बना रखा था स्वर्ग, जेल में कैदी ले रहे मटन का मज़ा
हमारे CRPF के जाबांज जवान अपनी जान पर खेलते हुए आतंकवादियों को पकड़ते हैं और जेल में ये सोचकर डालते हैं कि अब इसकी तगड़ी ठुकाई होगी. लेकिन नहीं ये जेलर ने इस जेल को आतंकवादियों के लिए स्वर्ग बना रखा था. होटल वाला शानदार खाना और आतंकी गतिविधियां चलाने की पूरी छूट. मोबाइल फ़ोन की खुली छूट जिसे ये आतंकी सीधा पाकिस्तान के संपर्क में थे.

पत्थरबाजों को गिरफ्तार करके पुलिस को लगता था कि उन्होंने बड़ा काम किया है. लेकिन इस जेल में उन पत्थरबाजों को आतंकवादी बनाने के लिए प्रशिक्षण दिया जाता था, हथियार दिए जाते थे नक्शा दिया जाता था और गुपचुप तरीके से POK भेजा जाता था ताकि ये और उच्च स्तर के आतंकवादी बन सकें.

NIA द्वारा पकड़े गए डिप्टी जेल सुपरिंटेंडेंट फिरोज अहमद लोन और मुख्य साजिशकर्ता इशाक पाला की मिलीभगत से जेल में आतंकी समर्थकों का काम चल रहा था। एनआईए टीम ने खुलासा किया कि दोनों के संपर्क अल बदर आतंकी संगठन से हुए। अल बदर के लिए नए आतंकी तैयार करने की जिम्मा उन्हें सौंपा गया था.

बता दें हिजबुल के कार्यों की जानकारी सुरक्षाबलों को नहीं लग पाए। इसके लिए भट ने जेलर से सांठगांठ की। दोनों आतंकियों को सीमा पार करते समय सुरक्षबलों ने पकड़ा था। एनआईए ने 13 मई 2018 को श्रीनगर सेंट्रल जेल में छापा मारा। छापे के दौरान लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिद्दीन और पाकिस्तान के झंडे भी बरामद किए थे.

एनआईए ने 25 मोबाइल, सिम कार्ड, आईपैड और धार्मिक किताबें आदि भी जब्त किया गया था. इन्ही किताबों से धर्म के नाम पर कट्टरपंथी और आतंकवादी बनाने की ट्रेनिंग दी जाती थी. NIA ने सेंट्रल जेल की करीब दो दर्जन बैरकों में जांच की। जहां अलग-अलग आतंकी संगठनों के आतंकियों से पूछताछ की और कई आपत्तिजनक सामान को बरामद किया था.

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