पीएम मोदी के चहेते मंत्री ने आरक्षण को लेकर सुनाया बड़ा फैसला, कांग्रेस समेत विपक्षी पार्टियों के उड़े होश

नई दिल्ली : महाराष्ट्र में अब मराठा आरक्षण का मुद्दा खड़ा हो गया है तो वहीँ अब महाराष्ट्र के मुस्लिम संगठनों ने भी अपने लिए आरक्षण की मांग उठा दी है और इसके पीछे भी कांग्रेसी नेता का दिमाग है. सकल मराठा समिति की तर्ज पर अब मुस्लिम आरक्षण संयुक्त समिति की स्थापना की गई है. कांग्रेस के राज्यसभा सांसद हुसैन दलवई ने बताया कि मुस्लिम समाज लंबे समय से आरक्षण की मांग कर रहा है. उन्होंने कहा कि अब विधिवत तरीके से आरक्षण की लड़ाई लड़ी जाएगी. तो वहीँ इस बीच मोदी सरकार ने बड़े मंत्री ने आरक्षण को लेकर बड़ा एलान कर दिया है जिसने सभी आरक्षण पर राजनीति करने वालों की बोलती बंद कर दी है.


अभी मिल रही मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र में जारी मराठा आरक्षण आंदोलन के बीच केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने आरक्षण पर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि जाति के आधार पर नहीं बल्कि गरीबी के आधार पर आरक्षण देने की जरूरत है क्योंकि गरीब की जाति, भाषा और क्षेत्र नहीं होती है और हम इस क्षेत्र में भी प्रयास कर रहे हैं.

मतलब ये बात तो साफ़ है कि जो मांग पूरे देश की जनता की है केंद्र सरकार भी उसी दिशा में सोच रही है. आज आरक्षण एक बड़ा मुद्दा इसलिए बन गया है क्यूंकि जो लोग आर्थिक तौर पर सक्षम हैं वो भी अब इस आरक्षण का गलत फायदा उठा रहे हैं जबकि सही मायने में आरक्षण सबसे पहले उसे मिलना चाहिए जो बेहद गरीब है जिसके लिए खाने की दो वक़्त की रोटी भी जुटाना ज़िन्दगी से जंग लड़ने के बराबर है.

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वरिष्ठ बीजेपी नेता और सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने महाराष्ट्र के औरंगाबाद में पत्रकारों से कहा कि निराशा और असुविधा के कारण आरक्षण की मांग हो रही है. इसलिए गांव के अंदर खेती में उपज बढ़ाना जरूरी है और प्रति व्यक्ति आय बढ़ाना जरूरी है. उन्होंने उम्मीद जताई कि मराठा आरक्षण के मुद्दे पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस हल निकाल लेंगे.


दरअसल, कांग्रेस और एनसीपी सरकार ने साल 2014 में चुनाव के ठीक पहले मराठा आरक्षण के साथ मुस्लिमों को भी शिक्षा और रोजगार में पांच फीसदी आरक्षण दिया था. बाद में यह मामला अदालत में पहुंच गया था. अदालत ने रोजगार में पांच फीसदी आरक्षण पर रोक लगा दी थी, लेकिन शिक्षा में आरक्षण पर कोई रोक नहीं लगी.

मराठ समाज भी आक्रमक: राज्य में पिछले 10 साल से मराठा समाज आरक्षण की मांग कर रहा है. गुजरात के पटेलों और हरियाणा के जाटों की तरह ही यह समाज भी आरक्षण की मांग भी कर रहा है. इसके साथ ही दलित उत्पीड़न का मामला भी जुड़ा हुआ है. मराठा समुदाय का मानना है कि उनके साथ सैकड़ों वर्षों से अन्याय हुआ है. ऐसे में समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए आरक्षण जरूरी है.

मराठा आंदोलन को लेकर एक बार फिर से मराठा क्रांति मोर्चा ने राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर नवंबर महीने तक
उन्हें आरक्षण नहीं दिया गया तो वे एक बार फिर आंदोलन करेंगे.

 

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