ट्रम्प ने पाकिस्तान के खिलाफ लिया सबसे बड़ा फैसला, एक झटके में तोड़ दी इमरान की कमर, दाने दाने को मोहताज हुई जनता

नई दिल्ली : पाकिस्तान में नयी सरकार आने के बाद से अमेरिका ने पाकिस्तान को एक मौका दिया था कि वे अब आतंकवाद खात्मे का काम करेंगे. इसी वजह से इमरान के पीएम बनते ही सबसे पहले अमरीका का ही फ़ोन आया था लेकिन पाकिस्तान के मंत्री ने उल्टा अमेरिका को ही धमका दिया था. ऐसे में अमेरिका से दुश्मनी मोल लेना बहुत भारी पड़ गया है. पहले से ज़बरदस्त आर्थिक मंदी से जूझ रहे पाकिस्तान को अमेरिका ने बहुत बड़ा झटका दे दिया है.


अभी मिल रही मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान की नई इमरान सरकार की अमेरिका ने कमर तोड़ के रख दी है. नई सरकार बनने के बाद पाकिस्तान और अमेरिका के बीच चली आ रही खींचा-तानी के बीच अमेरिका ने पाकिस्तान को बड़ा झटका देते हुए आर्थिक मदद रोकने का फैसला किया है. इमरान खान ने सिर्फ अमेरिका ही नहीं भारत को भी फिर धोखा दिया है उसने अपने देश में बदलाव लाने के बजाय कश्मीर का मुद्दा सबसे पहले उठा लिया है.

अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने पाकिस्तान 300 मिलियन डॉलर (करीब 2100 करोड़ रुपये) की आर्थिक सहायता को रद्द कर दिया है. अमेरिका ने यह फैसला आतंकवादियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने के लिए इस्लामाबाद की कथित विफलता के बाद लिया है. माना जा रहा है कि इस कड़े फैसले के बाद पाकिस्तान का अमेरिका के साथ संबंध और भी खराब होगा. खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए इस बात का एलान किया था कि वे अब पाकिस्तान को एक फूटी कौड़ी नहीं देगा.

पेंटागन प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल कोनी फॉकनर ने शनिवार को जारी बयान में कहा, “दक्षिण एशिया रणनीति के समर्थन में पाकिस्तान की गतिविधयों में कमी की वजह से हम बाकी बची 30 करोड़ डॉलर की धनराशि भी रोक रहे हैं।” फॉकनर ने कहा, “हम लगातार पाकिस्तान पर दबाव बनाते रहे कि वह अपने यहां सभी आतंकवादी गुटों के खिलाफ कोई त्वरित कार्रवाई करे लेकिन ऐसा नहीं किया गया। हम अब 30 करोड़ डॉलर की धनराशि का इस्तेमाल अपनी आवश्यक प्राथमिकताओं के लिए करेंगे।”

 

अमरीका की लंबे समय से शिकायत रही है कि पाकिस्तान अफगान तालिबान, हक्कानी नेटवर्क और अल कायदा जैसे आतंकवादी गुटों का गढ़ बना हुआ है। गौरतलब है कि साल 2002 से पाकिस्तान को अमेरिका से आर्थिक मदद के तौर पर 33 अरब डॉलर से अधिक की धनराशि मिलती रही है। इसमें 14 अरब डॉलर की गठबंधन सहयोग धनराशि भी हैं.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट की मानें तो संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने पाकिस्तान पर विद्रोहियों को सुरक्षित पनाह देने का आरोप लगाया है, जो “पड़ोसी अफगानिस्तान में 17 वर्षीय युद्ध” के लिए जिम्मेदार हैं. हालांकि, पाकिस्तान ने इस तरह के किसी भी आरोप से इनकार कर दिया है.

बता दे पाकिस्तान कुछ समय से आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहा है. नए प्रधानमंत्री इमरान खान के सामने सबसे बड़ी चुनौती पाकिस्तान को इस आर्थिक संकट से उबारने की है. इमरान खान सरकारी खर्चों में कटौती इस उस कदम भी उठाए हैं. पाकिस्तान के ऊपर पहले से दुनिया भर की तमाम संस्थाओं का कर्जा है, उसे अब और कर्जा मुश्किल हैं. ऐसे में अमेरिका की ओर से मदद रोक जाने का एलान पाकिस्तान के नासूर पर नमक जैसा है.

 

 

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