सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार के ऐतिहासिक फैसले के खिलाफ सुनाया कड़ा फरमान, जाँच रिपोर्ट को मानने से किया इंकार, दंग रह गयी जनता

नई दिल्ली : अभी हाल ही में मोदी सरकार ने एक बहुत बड़ा फैसला लिया था जिसके बारे में हमने आपको बताया था. वो ये कि मोदी सरकार ने देश में छुपे बैठे ऐसे भ्रष्ट लोग जो आम आदमियों के खून में ज़हर घोल रहे थे इतने सालों से उनका भंडाफोड़ कर उनपर बैन लगाया था.

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सरकार ने 328 फिक्सड डोज कॉम्बिनेशन दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण पर रोक लगाया था. ये सभी दवाएं डीएटीबी की जांच रिपोर्ट में फेल पायी गयी थी. डीटीएबी ने अपनी रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला था कि 328 एफडीसी दवा का किसी तरह का चिकित्सीय औचित्य नहीं है। यह लोगों के लिए सेहत के लिए बेहद खतरनाक हैं. बोर्ड ने इन पर बैन लगाने की सिफारिश भी की थी. जिनका सरकार पालन कर रही थी.

इनमे दर्द निवारक सारिडॉन, त्वचा क्रीम पांडर्म, संयोजन मधुमेह की दवा ग्लुकोनॉर्म पीजी, एंटीबायोटिक ल्यूपिडिक्लोक्स और एंटीबैक्टीरियल टैक्सिम एजेड जैसी लोकप्रिय दवाओं के नाम शामिल थे. इन कंपनियों की सालाना कमाई आज 700 करोड़ से ऊपर की है. लेकिन आज आखिरकार फिर सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टांग बीच में अड़ा दी और मोदी सरकार के इस फैसले के खिलाफ ही अपना फरमान सुना दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार के फैसले के खिलाफ सुनाया फैसला

अभी मिल रही बड़ी खबर के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने सेरिडॉन और कुछ अन्य दवाओं पर सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को हटा दिया है. जबकि ये और दूसरी दवाएं जांच रिपोर्ट में फेल हुई हैं खुद जांच एजेंसी की बात मानने से कोर्ट ने मना कर दिया है. जबकि कोर्ट ने ही दवाइयों को जांचने के आदेश दिए थे.

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सरकार के फैसले के खिलाफ दवा कंपनियों ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी. दो साल से ये केस सुप्रीम कोर्ट में लटका हुआ था. पेनकिलर सेरिडॉन और स्किन क्रीम पैनड्रम उन 328 एफडीसी दवाओं में थे जिन्हें सरकार ने उनके ‘अनुचित उपयोग’ को रोकने के लिए प्रतिबंधित कर दिया था.

 

सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि सिर्फ इसलिए इन दवाओं को बंद कर दिया जाए क्‍योंकि ये 1988 से पहले की निर्मित हैं. ड्रग टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड की नोटिफिकेशन के मुताबिक 328 कॉम्बिनेशन मेडिसिन बंद की गई हैं. ये फिक्‍स्‍ड डोज कॉम्बिनेशन में आती है. इन्‍हें इसलिए बंद किया जा रहा है क्‍यों इनका कोई थेरेप्टिक जस्टिफिकेशन नहीं है. बोर्ड का कहना है कि ये दवाएं रोगियों के लिए रिस्‍की भी हैं.

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इससे पहले सरकार ने कहा था कि वो छह और दवाओं के उत्‍पादन, बिक्री और वितरण पर रोक लगाएगी. इस प्रतिबंध से 1.18 लाख करोड़ रुपए के फार्मा उद्योग से 1500 करोड़ रुपए का कारोबार बंद होने का अनुमान है. जिन दवाओं पर प्रतिबंध लगाया गया है, उनमें सिरदर्द , सिरप समेत कई रोगों की दवाएं शामिल हैं. इनमे से कई दवाओं पर तो विदेशों में भी बैन लगा दिया गया है.

लेकिन हमारे कोर्ट का ये मानना है क्यूंकि ये दवाएं 1988 से भारत में हैं इसलिए इन्हे चलने देना चाहिए. लेकिन बड़े ही आश्चर्य की बात है पहले कोर्ट इसी डीटीएबी जांच एजेंसी से जांच करे जाने का फैसला सुनाता है और जब जांच रिपोर्ट में ये साबित हो जाता है ये दवाएं हानिकारक हैं फिर अब कोर्ट उसी जांच रिपोर्ट को मानने से इंकार कर देता है. ये फैसला भी सुप्रीम कोर्ट के पिछले कई फैसलों में से एक है जो लोगों के मन को खटकने लगा है.

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तो वहीँ ऑल इंडिया ड्रग एक्शन नेटवर्क (जो एक नागरिक समाजिक समूह और दवा प्रयोग सुरक्षा पर काम कर रहा है) ने 328 दवाओं पर प्रतिबंध का स्वागत किया है। यह समूह सुप्रीम कोर्ट में दवाओं के बैन करने वाले याचिकाकर्ताओं में एक था। इस समूह ने अन्य 15 एफडीसी पर भी तत्काल कार्रवाई करने की मांग की है.

 

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