राम मंदिर का इंतज़ार हुआ ख़त्म, राम भक्तों के लिए आयी बहुत बड़ी खुशखबरी, कांग्रेस वकीलों को लगा बड़ा झटका

नई दिल्ली : राम मंदिर का मुद्दा इस वक़्त सुप्रीम कोर्ट में फंसा हुआ है. कई दशकों से इसकी सुनवाई चले आ रही है और तारीख पर तारीख आगे बढ़ती रही है लेकिन अब रामभक्तों के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है. राम मंदिर का बनना तय हो गया है. सारे समझौते कर लिए गए हैं.

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अभी मिल रही ताज़ा खबर के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट राम मंदिर पर फैसला सुनाने से हमेशा बचता रहा है. इसीलिए कोर्ट ने अयोध्या में राम मंदिर पर एक सलाह ये भी दी थी कि अगर हो सके तो इसका दोनों समुदाय मिल बैठकर किसी समझौते से हल निकाल लें.

दरअसल शिया मुस्लिम समुदाय तो राम मंदिर के पक्ष में है सिर्फ वो लेकिन दूसरा सुन्नी समुदाय अड़ा हुआ था. जबकि शिया समुदाय ने कह दिया है कि ये उनका मसला है किसी और समुदाय का इससे कोई लेना देना नहीं है. कांग्रेस भी इसी समुदाय का राम मंदिर के विरोध में केस लड़ रही है. तो वहीँ शिया समुदाय ने कहा है हमें कहीं दूर मस्जिद मिल भी जायेगी तो भी हम खुश रहेंगे ये भगवान राम का जन्म स्थल था और रहेगा इसीलिए मंदिर यही बनना चाहिए.

अयोध्या में राम मंदिर को लेकर राम जन्म भूमि न्यास के कार्यकारी अध्यक्ष डॉक्टर राम विलास वेदांती ने बड़ा दावा किया है. वेदांती ने दावा किया है कि राम मंदिर निर्माण का फॉर्मूला आपसी सहमति से निकाल लिया गया है। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया है कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर अगले 2019 लोकसभा चुनाव से पहले बनना शुरू हो जायेगा.

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फॉर्मूला निकाल लिया है

वेदांती ने कहा कि अयोध्या विवाद के पक्षकारों ने मंदिर निर्माण को लेकर आपसी सहमति का फॉर्मूला निकाल लिया है, यह फॉर्मूला अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन की मध्यस्थता के बाद आपसी सहमति के चलते सामने आया है.

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उन्होंने कहा उन्ह एक मस्जिद चाहिए थी हम उन्हें लखनऊ में एक मस्जिद दे देंगे और वे हंसी ख़ुशी अयोध्या में भव्य, विशाल राम मंदिर बनाने में सहयोग भी करेंगे. हालाँकि वेदांती ने कहा कि लखनऊ में जो मस्जिद बनेगी उसका नाम बाबर हरगिज़ नहीं होगा.

वेदांती ने मीडिया से बाातचीत के दौरान यह तमाम दावे किए हैं। आपको बता दें कि वेदांती पूर्व भाजपा सांसद है और राम जन्म भूमि न्यास के कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं। वेदांती ने कहा कि अक्टूबर से पहले सुप्रीम कोर्ट में आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट होने का हलफनामा दाखिल कर दिया जाएगा और अदालत की इसपर मुहर के बाद भव्य मंदिर के निर्माण का कार्यक्रम शुरू हो जाएगा.

वेदांती की मानें तो सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा अपने रिटायरमेंट से पहले अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के इस फॉर्मूले को अपनी सहमति दे देंगे। आपको बता दें कि जस्टिस दीपक मिश्रा 2 अक्टूबर को रिटायर हो रहे हैं। । वेदांती ने कहा कि देश में अमन चैन को बढ़ाने के लिए और भाई चारा कायम रखने के लिए लखनऊ में प्रस्तावित मस्जिद और अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण का कार्य सब लोग मिल जुलकर करेंगे.

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