बाबरी पर कोर्ट का फैसला आते ही राम मंदिर निर्माण कार्यशाला में हथोड़ी छैनी की आवाज़ हुई तेज़, पहुंचे ट्रक और क्रेन, भक्तों में ख़ुशी की लहर, कांग्रेस के पैरों तले हिली ज़मीन

जयपुर : सुप्रीम कोर्ट का मस्जिद में नमाज पढ़ने को लेकर आए फैसले के बाद ये तय माना जा रहा है कि अब राम मंदिर बनने से कोई रोक नहीं सकता. इसी के चलते राम मंदिर के निर्माण के लिए पत्थर का काम तेज हो गया है. बताया जा रहा है की राम मंदिर व् बाबरी मस्जिद मामले की सुनवाही में नमाज को लेकर दिए गए फैसले के बाद उम्मीद है कि राम मंदिर को लेकर भी कभी भी फैसला आ सकता है.


तो वहीँ सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद VHP और RSS में भी काफी जोश दिखाई दे रहा है. एकाएक बड़ी बड़ी मीटिंग और चर्चाएं शुरू हो गयी हैं. एकसाथ कई ट्रक और क्रेन नज़र आने लगी हैं. कोर्ट के बाबरी नमाज़ के फैसले के बाद से अयोध्या में सरगर्मियां काफी तेज हो गई हैं. राम मंदिर निर्माण के लिए पत्थरों को तराशने के काम में भी तेजी दिखाई देने लगी है.

अयोध्या के श्री रामजन्मभूमि न्यास कार्यशाला में छेनी और हथौड़ी की आवाज एक बार फिर तेज हो गई है. पहले से तराशे गए पत्थरों पर जमी काई को हटाने का काम शुरू कर दिया गया है.यही नहीं साधु-संत भी 2019 से पहले राम मंदिर निर्माण हो जाने की बात कह रहे हैं. इसीलिए विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने भी तैयारी में तेजी लाई है.

VHP के अवध क्षेत्र के प्रवक्ता शरद शर्मा ने कहा कि राम मंदिर के लिए 1.75 लाख घन पत्थर की जरूरत है. मौजदा समय में 1.10 लाख घन पत्थर को तराशने के काम पूरा हो चुका है. रंग मंडप, कोहली गर्भगृह और सिंह द्वार बनकर तैयार हैं. 106 खंभे बनकर तैयार हैं. लगभग ऊपर के लिए इतने ही खभों पर काम चल रहा है. मंदिर निर्माण के लिए 65 फ़ीसदी नक्काशी का काम पूरा हो चुका है. ये भगवन श्री राम भक्तों के लिए अब तक की सबसे बड़ी खुशखबरी है हालाँकि कांग्रेस और वकील कपिल सिब्बल को इसे पढ़कर सीने में जलन ज़रूर उठेगी. वैसे तो आज कल राहुल गाँधी खुद शिवभक्त और रामभक्त बने घूम रहे हैं.


वहीं आपको बता दे कि 5 अक्टूबर को श्री राम जन्म भूमि संत उच्चाधिकार समिति की बैठक दिल्ली में होने जा रही है, हालांकि ये बैठक पहले से निर्धारित थी लेकिन कोर्ट के फैसले के बाद सभी के मन में इस बैठक के प्रति उत्साह बढ़ा है. बताया जा रहा है कि राम मंदिर के निर्माण के लिए पत्थर के ट्रक मंगाए जा चुके. वहीं अब इन पर नक्काशी के लिए कई लोगों को काम पर भी रखा जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट फैसला सुना चुका है कि मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है, लिहाजा नमाज पढ़ने के लिए बाबरी मस्जिद निर्माण की कोई जरुरत नहीं है. इस मामले में 3 जजों की बेंच थी जिसमें 2-1 से फैसला आया है, यानी दो जज ने इस फैसले का समर्थन किया है, वहीं 1 जज इस फैसले के विरोध में थे.

तीसरे जज ने कहा कि वो अपने दो साथी जजों के बात से सहमत नहीं है. जस्टिस नजीर ने इस मामले में डीसेंटिंग राय दी. वहीं कोर्ट ने इस बात को भी साफ़ कर दिया है कि इस मामले को अब बड़ी बेंच के पास नहीं भेजा जाएगा और अब ये मामला सिर्फ जमीन को लेकर रह गया है.


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